किसी भी भाषा का महत्व केवल उसकी व्याकरण से नहीं हो सकता है उसके लिए समृद्ध साहित्य का होना नितांत आवश्यक है, साहित्य ही सिनेमा का द्वार खोलता है सिनेमा साहित्य की बैसाखी पर सवार होकर लोगों का मनोरंजन करता है। मनोरंजन की दुनिया में फिल्मों का स्थान सर्वोच्च है उन्ही फिल्मों में हिंदी फिल्मों का बाजार सबसे बड़ा है। हिंदी विश्व के लगभग 20 देशों से अधिक में देशों बोली और समझी जाती है। हिंदी को बोलने वालों की संख्या की दृष्टि में यह विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है, यह आँकड़ा दिनोदिन बढता ही जा रहा है जो हम सबके लिए गर्व करने योग्य है।
आज हिंदी की सफल फिल्मों को जितने मन से हिंदी भाषी क्षेत्र में देखा जाता है उतने ही मन के साथ अन्य क्षेत्रों में भी देखा जाता है। भारतीय सिनेमा जगत की पहली बोलती फिल्म ‘आलम आरा’ की भाषा हिंदी ही थी ‘आलमआरा’ से प्रारम्भ हुई भारतीय सिनेमा की यात्रा आज भी अपने सर्वोत्कृष्ट सीमा पर गतिमान हैं। हिंदी सिनेमा उद्योग ने भारत ही नहीं विदेशों में भी अपना एक अलग मुकाम व रिश्ता कायम किया है जो आज फैलाव की दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण है। हिंदी का बाजार इतना अधिक विस्तृत होने के कारण आज होलीवूड की फ़िल्में भी हिंदी में डबिंग की जाती है भारत में भी टोलीवूड सिनेमा की फिल्मों ने तो हिंदी डबिंग के बाद अधिक उनका प्रचार-प्रसार हुआ है हाल ही के वर्षों में आई बाहुबली फिल्म इसका सर्वोत्तम उदहारण है।
