साहित्य की दुनिया और सरकारें
साहित्य और सरकारें समाज की दो प्रभावशाली शक्तियाँ हैं। एक ओर साहित्य मनुष्य की संवेदना, चेतना और विवेक का स्वर है, तो दूसरी ओर सरकारें शासन, व्यवस्था और नीति की प्रतिनिधि होती हैं। इतिहास साक्षी है कि जब-जब सत्ता ने अपनी सीमाएँ लांघीं, तब-तब साहित्य ने प्रश्न उठाए; और जब समाज दिशाहीन हुआ, तब साहित्य […]
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